कालसर्प पूजा तिथि फरवरी 2026

फरवरी 2026 में कालसर्प पूजा के शुभ मुहूर्त: जाने सही तिथि

2026 का साल कई ग्रहों के संयोजन की वजह से ज्योतिषियों के अनुसार महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर राहु–केतु के प्रभाव के चलते। ऐसे में जो लोग अपने जीवन में लगातार अटकाव, मानसिक चिंता, नकारात्मक परिवर्तन या अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं, उनके लिए कालसर्प दोष पूजा एक मुख्य वैदिक उपाय मानी जाती है।

फरवरी 2026 में कालसर्प दोष पूजा कराना उन लोगों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है जो जीवन की बाधाओं, मानसिक तनाव या नकारात्मक प्रभावों से परेशान हैं। विशेष रूप से 9 फरवरी 2026 (मौनी अमावस्या) जैसे श्रेष्ठ दिन पूजा कराना एक महत्वपूर्ण वैदिक उपाय है। कालसर्प दोष पूजा को उज्जैन की पावन भूमि और परंपरागत विधि ओर अधिक प्रबल और फलदायी बनाते हैं।

कालसर्प दोष क्या है और कैसे जीवन को प्रभावित करता है?

कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी ग्रह केवल राहु और केतु के बीच स्थित हो जाते हैं। इस स्थिति में ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव कम और नकारात्मक प्रभाव अधिक दिखाई देते हैं। ग्रहों की यह असंतुलन स्तिथि जीवन की दिशा में रुकावटें, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य की समस्याएं, शादी या करियर में देरी जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है।

फरवरी 2026 के लिए कालसर्प दोष पूजा तिथियाँ कौन-सी है?

कालसर्प दोष की पूजा की विशेष तिथियाँ

ज्योतिष के अनुसार हर महीने में कुछ तिथि और नक्षत्र ऐसे बनते हैं, कालसर्प दोष शांति पूजा शुभ मुहूर्त में करना अधिक फलदायी माना जाता है।

  • 1 फरवरी 2026 – अमावस्या (रविवार) → साल की पहली अमावस्या – नई शुरुआत के लिए सबसे अच्छी
  • 16 फरवरी 2026 – प्रदोष तिथि (सोमवार) → शिव कृपा से दोष शांत होता है
  • 24 फरवरी 2026 – प्रदोष तिथि (मंगलवार) → मंगलवार + प्रदोष का संयोग – बहुत तेज असर
  • हर सोमवार – 2, 9, 16, 23 फरवरी → महाकाल की कृपा से दोष जल्दी खत्म
  • पुष्य नक्षत्र वाले दिन – फरवरी में 3-4 तारीखें आ रही हैं (पंडित से चेक करवाएं)

सबसे अच्छा दिन चुनने का नियम

  • अगर दोष गंभीर है → 17 फरवरी या 24 फरवरी चुनें
  • अगर जल्दी करवाना है → कोई भी सोमवार या अमावस्या

9 फरवरी 2026 – अमावस्या (मुख्य पूजा तिथि)

अमावस्या का दिन ग्रह दोषों से मुक्ति और पितृ शांति हेतु सर्वोत्तम माना जाता है।
9 फरवरी को होने वाली अमावस्या कालसर्प दोष पूजा के लिए सबसे प्रमुख और प्रभावशाली दिन माना जा रहा है।

26 फरवरी 2026 – मंगलवार, राहु योग में अनुकूल योग

इस दिन ग्रह स्थिति विशेष रूप से राहु और केतु के प्रभाव से जुड़ी पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। न सिर्फ मंगल का दिन होने के कारण ऊर्जा का संतुलन मिलता है, बल्कि राहु योग के मध्य पूजा का प्रभाव अधिक मजबूत होता है।

फरवरी 2026 में कालसर्प पूजा कराना क्यों है महत्वपूर्ण?

फरवरी 2026 वह माह है जब ग्रहों की चाल में कुछ विशेष परिवर्तन हों रहे हैं। राहु–केतु की चाल व्यक्ति के जीवन में असमंजस और थकावट ला सकती है। ऐसे समय में:

  • परेशानी और तनाव कम होता है
  • मानसिक स्पष्टता मिलती है
  • बाधाओं की निरंतरता टूटती है
  • जीवन में संतुलन स्थापित होता है

इसलिए फरवरी के प्रमुख दिनों में पूजा कराना शुभ और लाभकारी माना जाता है।

कालसर्प दोष पूजा उज्जैन में क्यों कराई जाती है?

उज्जैन एक आध्यात्मिक नगरी है जिसका संबंध शिव साधना, समय और ग्रहों से गहरा जुड़ा हुआ है।

उज्जैन में पूजा कराने के प्रमुख कारण:

  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व — समय और काल के स्वामी भगवान शिव हैं।
  • शिप्रा नदी की पवित्रता — स्नान से दोष का शमन माना जाता है।
  • अनुभवी और परंपरागत पंडित — विधि के अनुसार मंत्र, हवन और पूजा कराते हैं।
  • शांत और धार्मिक वातावरण — ऊर्जा संतुलन के लिए उपयुक्त।

इन कारणों के चलते उज्जैन को कालसर्प दोष पूजा का श्रेष्ठ केंद्र माना जाता है।

कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?

कालसर्प दोष पूजा पूरी तरह वैदिक नियमों के अनुसार संपन्न की जाती है।
पूजा के दौरान निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  1. संकल्प — जातक का नाम, जन्म विवरण और समस्या का उल्लेख
  2. गणेश पूजन — पूजा की बाधा न आए इसके लिए
  3. नवग्रह पूजन — सभी ग्रहों की शांति
  4. राहु–केतु शांति मंत्र जाप
  5. विशेष हवन/यज्ञ — पंचाग्नि आहुति
  6. पूर्णाहुति और आशीर्वाद

पूजा का समय साधारणतः 3 से 4 घंटे तक लिया जा सकता है।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

जब यह पूजा सही श्रद्धा, शुभ मुहूर्त और योग्य पंडित द्वारा की जाती है तो व्यक्ति को निम्न लाभ प्राप्त हो सकते हैं:

  • तनाव, भय और मानसिक उलझन में कमी
  • जीवन में स्थिरता और संतुलन
  • विघ्न, बाधा तथा रुकावटों में कमी
  • विवाह और पारिवारिक जीवन में सुधर
  • करियर व धन में सुधार
  • कल्याणकारी ऊर्जा का प्रभाव

ये लाभ धीरे-धीरे और स्थायी रूप से महसूस होते हैं।

कालसर्प पूजा के लिए शुभ समय और मुहूर्त कौन-सा है?

कालसर्प दोष पूजा के लिए इन बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है:

  • अमावस्या तिथि
  • मंगलवार या शनिवार
  • अभिजीत मुहूर्त (विशेष समय, दिन के मध्य)
  • राहु काल से परे समय

सर्वश्रेष्ठ लाभ के लिए इन समयों का निर्माण कुंडली या पंडित की सलाह से भी किया जा सकता है।

उज्जैन में कालसर्प पूजा करने का खर्च कितना है?

उज्जैन में कालसर्प पूजा का खर्च पूजा के प्रकार, सामग्री और पंडित के अनुभव पर निर्भर करता है।
आम तौर पर पूजा की लागत लगभग ₹2,000 – ₹5,000 के बीच (जिसमें मंत्र जाप, हवन, सामग्री और पंडित दक्षिणा शामिल हो सकते हैं) पूजा का सही खर्च जानने लिए अभी उज्जैन के अनुभवी पंडित कांता शर्मा जी से संपर्क करें।

आप चाहें तो इससे अधिक संख्या में मंत्र जप या विस्तृत कार्यक्रम भी करवा सकते हैं, जिससे खर्च थोड़ा अधिक हो सकता है। पंडित जी से पूरी जानकारी प्राप्त करें।

कालसर्प पूजा से पहले और बाद क्या करें?

पूजा से पहले

  • शारीरिक और मानसिक शुद्धता
  • सात्विक भोजन
  • नकारात्मक विचारों से दूरी

पूजा के बाद

  • मंत्र जाप जारी रखें
  • संयमित जीवनशैली
  • नियमित ध्यान और सकारात्मक व्यवहार।

ये सरल नियम पूजा का प्रभाव मजबूत करने में मदद करते हैं।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा बुकिंग कैसे करें?

2026 का फरवरी महीना कालसर्प दोष शांत करने के लिए बहुत शुभ है। अगर आप भी इस दोष से परेशान हैं तो इस महीने पूजा कराना बहुत ही शुभ और लाभकारी माना गया है, पूजा की बुकिंग अभी करें और इस दोष से छुटकारा पाएँ। आज ही नीचे दिये गए नंबर पर कॉल करें।

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