उज्जैन में कालसर्प पूजा के लिए सबसे उत्तम मंदिर

उज्जैन कालसर्प दोष पूजा मंदिर: श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन

उज्जैन, जिसे महाकाल की नगरी कहा जाता है, भारत का एक ऐसा पवित्र तीर्थ स्थल है जहाँ अध्यात्म और ज्योतिष का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यह नगरी केवल भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहाँ के श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर को भी कालसर्प दोष निवारण के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन का वह आध्यात्मिक केंद्र है जहां कालसर्प दोष पूजा न केवल दोष निवारण, बल्कि जीवन सकारात्मकता का स्रोत बनती है। यदि आप संघर्षों से जूझ रहे हैं, उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए अनुभवी पंडित कांता शर्मा जी से संपर्क करें और इस दोष से छुटकारा पाएँ।

श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर का महत्व क्या है? जाने इस मंदिर की विशेषता

उज्जैन के 84 महादेवों में से 43वें स्थान पर विराजमान श्री अंगारेश्वर महादेव का उल्लेख स्कंद पुराण के अवंतिका खंड और मत्स्य पुराण में मिलता है। यह मंदिर मंगल ग्रह के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि देवाधिदेव भगवान शंकर ने पार्वती जी से कहा था, “कहाँ की हे?” और पार्वती ने उत्तर दिया, “अंगार से” – यहीं से ‘अंगारेश्वर’ नाम पड़ा। यह स्थान भूमिपुत्र मंगल की उत्पत्ति का प्रतीक है, जहां मंगल की क्रूर दृष्टि को शांत करने के लिए भात पूजा का विधान है।

इस मंदिर का निर्माण विक्रमादित्य काल से जुड़ा माना जाता है, और यह शिप्रा नदी के किनारे राम घाट के निकट स्थित है। प्राचीन काल से यहां मंगल दोष, भूमि दोष और ग्रह शांति के लिए पूजाएं होती आ रही हैं। यह कालसर्प दोष पूजा का भी प्रमुख स्थल बन गया है, क्योंकि उज्जैन की ज्योतिषीय ऊर्जा और महाकालेश्वर की निकटता इसे विशेष बनाती है।

उज्जैन के अंगारेश्वर मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, जो लाल अंगार (कोयले) जैसा चमकता है, और दर्शन मात्र से ग्रह दोषों का नाश होता है। यह मंदिर न केवल हिंदू धर्मावलंबियों के लिए, बल्कि ज्योतिष प्रेमियों के लिए भी एक तीर्थ है।

कालसर्प दोष पूजा का महत्व: क्यों चुनें अंगारेश्वर महादेव मंदिर?

कालसर्प दोष वह ज्योतिषीय योग है जहां सभी ग्रह राहु-केतु के बीच कैद हो जाते हैं, जिससे जीवन में अनंत बाधाएं आती हैं। उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का महत्व अंगारेश्वर महादेव मंदिर पर इसलिए है क्योंकि यह बाबा महाकाल के चरणों में और शिप्रा मोक्षदायिनी के तट पर होती है। यहां पूजा से 9 विभिन्न प्रकार के सर्पों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो राहु-केतु के विष को अमृत में बदल देता है।

इस मंदिर की विशेषता यह है कि यह मंगल दोष और कालसर्प दोनों का एक साथ निवारण करता है। यदि आपकी कुंडली में मंगल के साथ राहु-केतु का प्रभाव है, तो यहां की पूजा दोहरी शक्ति प्रदान करती है। पंडितों के अनुसार, शिप्रा स्नान के बाद की गई पूजा तुरंत फलदायी होती है, क्योंकि नदी के जल में पापों का नाश होता है। उज्जैन का अक्षांश-देशांतर ग्रहों की शांति के लिए आदर्श है, और मंदिर की ऊर्जा जीवन में सकारात्मक कंपन लाती है।

कालसर्प दोष पूजा की प्रक्रिया क्या है?

अंगारेश्वर महादेव मंदिर में कालसर्प दोष पूजा वैदिक पद्धति से की जाती है, जो 2-3 घंटे में होती है। अनुभवी पंडित (जैसे पंडित कांता शर्मा गुरुजी) के मार्गदर्शन में यह संपन्न होती है। यहां पूरी प्रक्रिया है:

  1. शुद्धिकरण और स्नान: सुबह शिप्रा नदी में स्नान करें। सफेद या पीले वस्त्र धारण कर मंदिर पहुंचें। पंडित जी कुंडली विश्लेषण करेंगे।
  2. संकल्प और कलश स्थापना: पूजा स्थल पर संकल्प लें। कलश स्थापित कर गणेश पूजन से विघ्न निवारण करें।
  3. नाग-नागिन पूजन: चांदी की नाग-नागिन प्रतिमा स्थापित करें। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। 9 सर्पों के नाम से पूजा करें।
  4. राहु-केतु शांति मंत्र जाप: पंडित जी “ॐ रां राहवे नमः” और “ॐ कें केतवे नमः” मंत्रों का जाप करेंगे।
  5. महामृत्युंजय जाप और रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर “ॐ त्र्यंबकं यजामहे…” का जाप और रुद्राभिषेक। यह दोष के विष को नष्ट करता है।
  6. होम और आहुतियां: अग्नि कुंड में विशेष सामग्री (तिल, घी) की आहुतियां दें। कालसर्प शांति मंत्र पढ़े जाएंगे।
  7. आरती और प्रसाद: अंत में आरती उतारें। प्रसाद (मिठाई, फल) वितरित होगा। पंडित जी आशीर्वाद देंगे।

कालसर्प पूजा का शुभ मुहूर्त और समय कौन-सा है?

अंगारेश्वर महादेव में कालसर्प पूजा वर्ष भर संभव है, लेकिन त्रयोदशी, अमावस्या, पूर्णिमा, नाग पंचमी, श्रावण मास या ग्रहण काल में विशेष फलदायी है। मंदिर का समय: सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक। पूजा सुबह 7-12 बजे या शाम 3-9 बजे की जाती है।

उज्जैन में कालसर्प पूजा में कितना खर्च आता है?

उज्जैन अंगारेश्वर मंदिर में पूजा का खर्च पूजा पंडित पर निर्भर करता है, पूजा का खर्च लगभग ₹2,100-5,000 (मंत्र जाप, हवन और दान सहित)। यदि अन्य दोष (जैसे मंगल) जुड़े हों, तो ₹1,000-2,000 अतिरिक्त हो सकता है।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

यहां पूजा से राहु-केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं, जिससे:

  • करियर और धन बाधाएं दूर होती है और सफलता के द्वार खुलते हैं।
  • वैवाहिक सुख कलह समाप्त तथा संतान प्राप्ति में सहायता मिलती है।
  • स्वास्थ्य रोग निवारण मे मदद और मानसिक शांति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति– 9 सर्प आशीर्वाद से समृद्धि प्राप्त होती है।

उज्जैन में कैसे कराएं कालसर्प दोष पूजा बुकिंग?

यदि आप भी उज्जैन में श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करवाना चाहते हैं, तो अनुभवी पंडितों की सहायता से अपनी पूजा बुक करें। यह पूजा आपके जीवन में नई दिशा और स्थिरता ला सकती है। अभी संपर्क करें और उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा बुक करें।

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