कालसर्प पूजा मुहूर्त जनवरी 2026

कालसर्प पूजा मुहूर्त जनवरी 2026- तिथि, महत्व, लाभ और उपाय

जब कुंडली में राहु–केतु से जुड़े ग्रहों का प्रभाव अधिक प्रबल हो जाता है, तो उसे कालसर्प दोष कहा जाता है। यह दोष जीवन में अनिश्चितता, बाधाएं, मानसिक बेचैनी, सफलता की देरी और नकारात्मकता पैदा करता है। वैदिक शास्त्र में बताया गया है कि कालसर्प दोष पूजा करने से इन प्रभावों को संतुलित किया जा सकता है। विशेष रूप से उज्जैन, जैसे सिद्ध स्थान पर कराई गई पूजा का प्रभाव और भी गहरा माना जाता है।

जनवरी 2026 में कालसर्प दोष पूजा, विशेषत: 18 जनवरी मौनी अमावस्या, वो समय है जब ग्रह दोषों का शमन अधिक तीव्रता से होता है। कालसर्प दोष पूजा उज्जैन जैसे वृंद स्थान पर कराई जाने पर न केवल उत्‍तम शुभता देती है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में नई दिशा, शांति और स्थिरता भी लाती है।

कालसर्प दोष क्या है ये दोष कैसे और कब बनता है, जाने महत्व?

Kaal Sarp Dosh Puja Ujjain

कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी ग्रह केवल राहु और केतु के मध्य ही स्थित हों। इससे ग्रहों का सकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है और नकारात्मक ग्रहों का दबदबा बढ़ जाता है।
इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति महसूस कर सकता है:

  • मानसिक दबाव और डर
  • बार-बार एक जैसी बाधाएं
  • विवाह, करियर या धन संबंधी देरी
  • स्वास्थ्य में समस्या
  • जीवन में असमंजस

इसीलिए विद्वान पंडितों द्वारा कालसर्प दोष शांति पूजा को एक प्रभावी उपाय माना गया है।

जनवरी 2026 में कालसर्प दोष पूजा के लिए शुभ तिथियाँ क्या है?

कालसर्प दोष की पूजा की विशेष तिथियाँ

नीचे जनवरी 2026 में वो मुख्य दिन दिए गए हैं जब कालसर्प दोष पूजा शुभ मुहूर्त में कराना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

17 जनवरी 2026 – प्रदोष तिथि (रविवार)

शिव कृपा से दोष शांत होता है। यह दिन कालसर्प पूजा के लिए शुभ माना जाता है।

18 जनवरी 2026 — मौनी अमावस्या

यह दिन शुद्धता, आत्मनिरीक्षण और ग्रह शांति का श्रेष्ठ अवसर देता है। मौनी अमावस्या को की गई पूजा को अमृत समान फल देता है। अमावस्या वैसे ही कालसर्प पूजा के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है, और इसी से 18 जनवरी को प्रमुख माना जाता है।

25 जनवरी 2026 — शुभ दिन

कुछ ज्योतिष पद्धतियों में इस दिन के ग्रह संयोग को कालसर्प दोष शांति के लिए शुभ माना जाता है। राशि, नक्षत्र और ग्रह योग के अनुसार अंतिम तिथि चयन योग्य होता है।

हर सोमवार

5, 12, 19, 26 जनवरी → महाकाल की कृपा से दोष जल्दी खत्म होता है।

जनवरी 2026 की प्रमुख कालसर्प दोष पूजा तिथियों का महत्व

मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या अध्‍यात्म और ग्रह दोष निवारण के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि मानी जाती है।
इस दिन की गई पूजा का प्रभाव:

  • मानसिक शांति
  • पूर्व जन्म के बंधनों का फल कम होना
  • पितृ दोष में राहत
  • राहु–केतु के नकारात्मक प्रभावों का शमन

अमावस्या की चंद्रमा रहित तिथि ग्रह दोषों की अधिकता को शांत करने का सबसे उपयुक्त समय देती है।

जनवरी में पूजा क्यों सबसे ज्यादा फलदायी होती है?

  • जनवरी में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है – सूर्य की ऊर्जा दोष को कमजोर करती है
  • शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव भी जनवरी में कम होता है
  • ठंड का मौसम – यात्रा और पूजा आसानी से की जा सकती है
  • नया साल – नई शुरुआत के लिए सबसे अच्छा समय

कालसर्प दोष पूजा क्यों उज्जैन में कराई जाती है?

उज्जैन को धर्म, ज्योतिष और ग्रह शांति के लिए एक श्रेष्ठ केंद्र माना जाता है।
यहां की प्रमुख विशेषताएं:

  • श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: काल के साथ जुड़ा शिव का रूप, जो समय, ग्रहों और जीवन के सभी पहलुओं पर अधिकार रखता है।
  • वैदिक परंपरा और पंडितों का अनुभव: उज्जैन के पंडित पारंपरिक विधि से पूजा कराते हैं, जिससे मंत्रों और हवन का प्रभाव गहरा होता है।
  • शांति और वातावरण: शांति, शिप्रा नदी का पवित्र जल और तीर्थ-स्थलों का वातावरण दोष शमन को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?

कालसर्प दोष शांति पूजा में ये मुख्य चरण होते हैं:

  • संकल्प और गणेश पूजन
  • नवग्रह और कालसर्प दोष शांति मंत्र जाप
  • हवन और आहुति
  • पूर्णाहुति और आशीर्वाद
  • पूजा के अंत में पूर्णाहुति होती है और परिवार, स्वास्थ्य तथा करियर के लिए शुभ संदेश दिए जाते हैं।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

कलसंर्प दोष पूजा के लाभ धीरे-धीरे जीवन में स्पष्ट दिखाई देते हैं:

  • मानसिक तनाव और भय में कमी
  • वैवाहिक जीवन में स्थिरता
  • धन, नौकरी और व्यवसाय में सुधार
  • बच्चों के स्वास्थ्य में संतुलन
  • जीवन में समग्र सकारात्मक ऊर्जा

इन लाभों का अनुभव पूजा के बाद नियमित ध्यान, जप और सरल नियम पालन से लंबी अवधि तक होता है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा में कितना खर्च आता है?

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का खर्च पूजा की विधि, सामग्री और पंडित की पद्धति पर निर्भर करता है।
आम तौर पर पूजा का खर्च लगभग ₹2,100 से ₹5,000 तक हो सकता है। (इसमें पूजा सामग्री, मंत्र जाप, हवन, पंडित दक्षिणा शामिल हो सकते हैं) यह एक अनुमानित पूजा खर्च है पूजा की सटीक जानकारी के लिए पूजा पंडित कांता शर्मा जी से संपर्क करें।

पूजा की गहन विधि, संख्या और वांछित लाभ के अनुसार खर्च ऊपर-नीचे हो सकता है।

कालसर्प पूजा से पहले और बाद पालन करने योग्य नियम क्या है?

पूजा से पहले

  • सात्विक भोजन रवाना
  • शराब/तम्बाकू से परहेज
  • सकारात्मक सोच और संयम

पूजा के बाद

  • जप या ध्यान को जारी रखें
  • दोष शांति मंत्रों का स्मरण
  • अनुशासन और संयम पर ध्यान

इन नियमों का पालन पूजा के प्रभाव को और मजबूत करता है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कैसे कराएँ?

यदि आप जीवन की अटकते हुए कार्यों, मानसिक तनाव या असफलताओं से उबरना चाहते हैं, तो कालसर्प दोष पूजा उज्जैन एक प्रभावी वैदिक उपाय है, जिसके द्वारा आप अपनी जीवन की सभी समस्याओं का समाधान कर सकते है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा की बुकिंग के लिए आज ही वहाँ के अनुभवी पंडित कांता शर्मा जी से संपर्क करें और अपनी पूजा बुक करें पंडित पूरी विधि और नियम के साथ पूजा सम्पन्न कराते है।

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