धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ दोष तब होता है, जब परिवार मे किसी की मृत्यु हो जाए और उसका अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से न किया जाए या परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाए, तो परिवार के साथ आने वाली पीढ़ियो को भी पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। अगर कुंडली मे नवा भाव या नवे भाव का स्वामी किसी भी प्रकार से राहू या केतू से प्रभावित हो, तो पितृ दोष का योग बनता है। पितृ दोष के कारण व्यक्ति तथा उसके परिवार को अनेक समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
पितरो के शुभाशीर्वाद से ही घर और परिवार मे सुख समृद्धि रहती है, किन्तु अगर पितृ नाराज हो तो, आने वाली कई पीढ़ियो को पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते है, कुछ ऐसी गलतियो के बारे मे जिनसे पितृ दोष होता है।
पितृ दोष के निम्नलिखित लक्षण होते है-
पितृ दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए महादेव की प्रतिमा के आगे “ॐ तत्पुरुषाय च विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात” मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र को पितृ दोष निवारण मंत्र भी कहा जाता है। अपने पूर्वजो की मुक्ति के लिए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष का दुष्प्रभाव कम होने लगता है, और जीवन मे आने वाली समस्त परेशनीया समाप्त हो जाती है।
पंडित जी के पास वर्षभर पितृ दोष निवारण पूजा के लिए लोग आते है, और अपनी समस्याओ और बाधाओ से छुटकारा पाते है। अगर आप भी अपनी किसी समस्या के समाधान के लिए पूजा करवाना चाहते है, तो नीचे दी गई बटन पर क्लिक करके पंडित जी से बात कर सकते है।